क्या मार्केट के छोड़े हुए ‘गैप’ हमेशा फील होते हैं? जानिए बड़ी खबरों के पीछे का असली सच

स्टॉक मार्केट के चार्ट पर अगर आप गौर करेंगे, तो आपको कई जगह ऐसी दिखेंगी जहाँ मार्केट बिना कोई कैंडल बनाए अचानक 200 या 300 पॉइंट ऊपर या नीचे खुल जाता है। तकनीकी भाषा में इसे हम गैप अप (Gap Up) या गैप डाउन (Gap Down) कहते हैं।

अक्सर नए ट्रेडर्स के दिमाग में एक बात डाल दी जाती है कि “बाज़ार अगर कोई गैप छोड़ता है, तो वह उसे भरने (Fill करने) तुरंत वापस आता है।” लेकिन कई बार ऐसा होता है कि नीचे एक बहुत बड़ा गैप छूटा हुआ है, और मार्केट उसे बिना भरे लगातार ऊपर, और ऊपर जाता ही रहता है। 1 महीना, 6 महीना या कभी-कभी 1 साल तक मार्केट उस गैप को छूने भी नहीं आता।

अब सवाल यह उठता है कि क्या वह गैप कभी भरेगा? और अगर भरेगा, तो मार्केट अचानक महीनों बाद वहाँ क्यों आता है? आज मैं आपको ‘बाज़ार सूत्र’ (bazarsutra.com) पर इसके पीछे का वो कड़वा सच बताऊंगा जो बड़े प्लेयर्स आपसे छुपाते हैं।

बिना गैप भरे मार्केट ऊपर क्यों जाता रहता है?

जब मार्केट नीचे 200-300 पॉइंट का एक बड़ा गैप छोड़कर अचानक रॉकेट की तरह ऊपर भागने लगता है, तो आम रीटेल ट्रेडर्स हर रोज़ इस डर में जीते हैं कि “मार्केट कभी भी गिर सकता है क्योंकि नीचे गैप बाकी है।” इस चक्कर में वे कभी भी ऊपर जाते हुए मार्केट में खरीदारी (Buy) नहीं कर पाते।

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि अगर मार्केट लगातार ऊपर जा रहा है, तो कोई न कोई तो वहाँ भारी मात्रा में खरीदारी कर रहा है। वह कौन है? वह हमारे देश के बड़े इंस्टीट्यूशंस (DIIs) और विदेशी इन्वेस्टर्स (FIIs) हैं, जिन्हें हम ‘स्मार्ट मनी’ कहते हैं। उन्हें अच्छे से पता होता है कि उन्होंने नीचे जो गैप छोड़ा है, वह एक पेंडिंग ऑर्डर ज़ोन (Pending Order Zone) है। वे जानबूझकर मार्केट को एकतरफा ऊपर खींचते हैं ताकि आम पब्लिक डर के मारे दूर रहे या शॉर्ट करके फंसती रहे।

खबरों का सहारा: मार्केट न्यूज़ नहीं बनाता, न्यूज़ मार्केट के लिए रास्ता बनाती है!

अब आता है इस खेल का सबसे बड़ा ट्विस्ट। जब मार्केट 6 महीने या 1 साल तक लगातार ऊपर रहने के बाद थक जाता है, और बड़े प्लेयर्स को अपना प्रॉफिट बुक करना होता है या नीचे छूटे हुए गैप्स से नए ऑर्डर्स उठाने होते हैं, तो वे सीधे मार्केट को नहीं गिराते।

मार्केट को नीचे लाने के लिए एक ठोस ‘कारण’ या बहाने की ज़रूरत होती है।

यहीं पर एंट्री होती है बड़ी-बड़ी खबरों की! अचानक आपको टीवी और सोशल मीडिया पर खबरें दिखने लगेंगी:

कोई वर्ल्डवाइड या ग्लोबल न्यूज़ (जैसे दो देशों के बीच युद्ध या तनाव)।​

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार (Global Markets) में अचानक बड़ी मंदी।​

कोई बड़ी इंडियन न्यूज़ या पॉलिसी में अचानक बदलाव।

आम रीटेल ट्रेडर को लगता है कि “अरे बाप रे! दुनिया में इतनी बड़ी खराब खबर आ गई, इसलिए आज मार्केट 300 पॉइंट क्रैश हो गया।” लेकिन सच यह होता है कि बड़े प्लेयर्स को चार्ट पर उस पुराने छूटे हुए गैप को फील करना था, और उन्होंने उस ग्लोबल न्यूज़ का इस्तेमाल सिर्फ एक ‘बहाने’ के रूप में किया ताकि वे पैनिक (डर) क्रिएट करके मार्केट को ठीक उसी जगह ला सकें।

गैप थ्योरी के पीछे की असली साइकोलॉजी

जब भी कोई वर्ल्डवाइड न्यूज़ आती है और मार्केट तेजी से नीचे गिरकर उस पुराने गैप के पास आता है, तो वहाँ दो चीजें एक साथ होती हैं:​

रीटेलर्स का पैनिक सेल: खराब खबर देखकर आम ट्रेडर्स डर के मारे सस्ते दामों पर अपने शेयर्स बेचने लगते हैं या भारी मंदी के ट्रेड ले लेते हैं।

​स्मार्ट मनी की नई बाइंग: बड़े प्लेयर्स, जिन्होंने महीनों पहले उस गैप को छोड़ा था, वे चुपचाप उस न्यूज़ के बहाने मार्केट को अपने मनपसंद रेट पर ले आते हैं। जहाँ रीटेलर्स डरकर बेच रहे होते हैं, वहीं बड़े इंस्टीट्यूशंस उस पुराने गैप पर अपनी नई बाइंग (खरीदारी) शुरू कर देते हैं।

​जैसे ही गैप फील होता है और रीटेलर्स पूरी तरह मंदी में फंस जाते हैं, न्यूज़ का असर खत्म हो जाता है और मार्केट दोबारा से एक नया हाई बनाने के लिए ऊपर की यात्रा शुरू कर देता है।

एक समझदार ट्रेडर (शिकारी) को क्या करना चाहिए?

अगर आप भी बाज़ार के इस चक्रव्यूह से बचना चाहते हैं, तो इन नियमों को हमेशा याद रखें:​खबरों के पीछे मत भागिए:

न्यूज़ सिर्फ एक जरिया है प्राइस को एक जगह से दूसरी जगह तेजी से ले जाने का। असली खेल हमेशा चार्ट के लेवल्स और पुराने छूटे हुए गैप्स में छिपा होता है।​

धैर्य रखें: अगर मार्केट कोई बड़ा गैप छोड़कर बहुत ऊपर निकल गया है, तो जबरदस्ती टॉप पर मत खरीदिए। शांति से समय बीतने दीजिए। जब महीनों बाद कोई खराब खबर आए और मार्केट ठीक उसी पुराने गैप के पास आकर कोई बुलिश स्ट्रक्चर बनाए, तो समझ जाइए कि यह बड़े प्लेयर्स की चाल है।​

समय बिताना ही चाबी है: चार्ट के सामने जो जितना समय बिताएगा, उसे खबरों और चार्ट के लेवल्स के बीच का यह कनेक्शन उतना ही साफ दिखने लगेगा।

निष्कर्ष: भाव ही भगवान है

स्टॉक मार्केट में खबरें सिर्फ स्क्रीन पर आती हैं, लेकिन ‘भाव’ सीधे आपकी जेब पर असर डालता है। नीचे छूटे हुए बड़े गैप्स हमेशा बाज़ार के लिए एक चुंबक (Magnet) की तरह काम करते हैं। जब भी कोई बड़ी ग्लोबल न्यूज़ आए, तो घबराने के बजाय चार्ट को खोलकर देखिए कि क्या मार्केट किसी पुराने पेंडिंग गैप को भरने आया है? अगर हाँ, तो वह डरने का नहीं, बल्कि सही स्ट्रक्चर देखकर एक बड़े खिलाड़ी की तरह एंट्री करने का मौका होता है।

क्या आपने कभी नोटिस किया है कि बड़ी खबरों के आते ही मार्केट ठीक पुराने लेवल्स या गैप्स पर आकर रुक जाता है? अपने विचार नीचे कमेंट में जरूर बताएं और ‘बाज़ार सूत्र’ को फॉलो करते रहें!

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