ट्रेडिंग करने का सही समय (Best Time for Trading in Hindi)

​क्या स्टॉक मार्केट में सच में टाइमिंग का खेल होता है? जानिए होटल बिजनेस और ट्रेडिंग का यह अनोखा ‘बाज़ार सूत्र’

जब भी कोई नया व्यक्ति ट्रेडिंग में आता है, तो उसे लगता है कि सुबह 9:15 बजे से लेकर दोपहर 3:30 बजे तक मार्केट खुला है, तो वह कभी भी बाय या सेल का बटन दबाकर पैसा कमा सकता है। लेकिन यह इस मार्केट का सबसे बड़ा भ्रम है। स्टॉक मार्केट में सही दिशा (Direction) से भी ज़्यादा महत्व सही समय (Timing) का होता है।

अगर आपकी टाइमिंग गलत है, तो आपका सही ट्रेड भी आपको बड़ा लॉस दे सकता है।​आज मैं आपको अपने ब्लॉग ‘बाज़ार सूत्र’ (bazarsutra.com) पर एक बहुत ही व्यावहारिक और देसी उदाहरण के साथ समझाऊंगा कि ट्रेडिंग में टाइमिंग क्यों ज़रूरी है और बाज़ार के किस समय आपको पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

मटन-चिकन की दुकान और ट्रेडिंग का समय: एक अनोखा उदाहरण

इस बात को एक आसान बिजनेस के उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी की एक बहुत अच्छी खाने की दुकान (होटल) है, जहाँ बहुत ही लाजवाब और स्वादिष्ट मटन और चिकन मिलता है।

उस दुकान की सेल बहुत अच्छी है और लोग दूर-दूर से खाने आते हैं।​अब आप खुद सोचिए, क्या लोग सुबह-सुबह 7 या 8 बजे सोकर उठते ही मटन-चिकन खाना पसंद करेंगे? बिल्कुल नहीं! सुबह के समय लोग हल्का-फुल्का नाश्ता करेंगे, चाय पिएंगे या बिस्किट-मैगी खाएंगे। मटन-चिकन खाने वाले ग्राहकों की असली भीड़ कब होगी?

दोपहर के समय—जब किसी का लंच टाइम 1:00 बजे होता है, किसी का 1:30 बजे, तो किसी का 2:00 बजे। कुछ लोग दोपहर में खाएंगे और कुछ रात के लिए पैक कराकर लेकर चले जाएंगे। यानी उस होटल के बिजनेस का ‘प्राइम टाइम’ (मुख्य समय) दोपहर का है।​ठीक इसी तरह, शेयर मार्केट भी एक बिजनेस है। यहाँ हर घंटे एक जैसी लिक्विडिटी और मूवमेंट्स नहीं होते। बाज़ार में भी ग्राहकों (बायर्स और सेलर्स) के आने का एक फिक्स टाइम होता है।

सुबह 9:15 का चक्रव्यूह: क्यों तुरंत मार्केट में नहीं घुसना चाहिए?

जैसे ही सुबह 9:15 बजे मार्केट का बेल बजता है, रीटेल ट्रेडर्स स्क्रीन पर ऐसे टूट पड़ते हैं जैसे कोई लॉटरी खुली हो। लेकिन यह सबसे खतरनाक समय होता है।​सुबह के पहले 15-20 मिनट में मार्केट में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) और भारी लिक्विडिटी होती है।

प्राइस पलक झपकते ही बहुत तेज़ी से ऊपर जाता है और अगले ही पल फटाक से नीचे गिर जाता है। ऐसा क्यों होता है?​इसके पीछे का कारण हैं AMO (After Market Orders) और पिछले दिन की बची हुई पोजीशंस।​जो लोग पिछले दिन ट्रेड होल्ड करके गए होते हैं, वे सुबह मार्केट खुलते ही अपनी पोजीशन से एग्जिट करते हैं, कोई अपना प्रॉफिट बुक करता है तो कोई पैनिक में आकर लॉस बुक करता है।​

इस अफरा-तफरी के माहौल में अगर आप बिना सोचे-समझे कूदेंगे, तो आपको चोट लगना तय है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे सुबह 7 बजे मटन की दुकान खोलकर बैठ जाना और उम्मीद करना कि भारी भीड़ आ जाएगी। सुबह के इस तूफ़ान में आपका स्टॉप-लॉस कुछ ही सेकंड्स में हिट हो जाएगा।

चलती ट्रेन में मत चढ़िए, अपने ज़ोन का इंतज़ार कीजिए

मार्केट में जब कोई बड़ी रैली आ रही होती है और प्राइस सपोर्ट या रेजिस्टेंस को छोड़कर बीच की लाइन (Midline) से ऊपर या नीचे की तरफ भाग रहा होता है, तो उसे ‘चलती ट्रेन’ कहते हैं। नए ट्रेडर्स फोमो (FOMO – छूट जाने का डर) के चक्कर में इस चलती ट्रेन में कहीं भी बीच में सवार हो जाते हैं। नतीजा? ट्रेन वहीं से रिवर्स हो जाती है और उनका एक्सीडेंट (लॉस) हो जाता है।​

एक प्रोफेशनल ट्रेडर कभी भी चलती ट्रेन में नहीं चढ़ता। वह शांत बैठता है। अगर सुबह का मोमेंटम छूट भी गया, तो कोई बात नहीं। नियम यह होना चाहिए कि सुबह की इस उथल-पुथल शांत होने दी जाए। आमतौर पर दोपहर 12:00 बजे से पहले जब मार्केट दोबारा आपके बनाए हुए लेवल्स या सपोर्ट-रेजिस्टेंस के ज़ोन में आए, सिर्फ तभी ट्रेड प्लान करना चाहिए। जब बाज़ार शांत होकर आपको सही रिस्क-रिवॉर्ड दे, तभी अपनी पोजीशन बनानी चाहिए।

निष्कर्ष: टाइमिंग ही तय करेगी आपका प्रॉफिट

जैसे एक सफल बिजनेसमैन जानता है कि उसके ग्राहक किस समय दुकान पर आएंगे, ठीक वैसे ही एक सफल ट्रेडर को पता होना चाहिए कि मार्केट में असली वॉल्यूम और सही मूव किस समय आएगा। सुबह 9:15 बजे की जल्दबाज़ी से बचिए, बाज़ार को थोड़ा सेटल होने का समय दीजिए, और दोपहर 12 बजे से पहले जब तक मार्केट आपके ज़ोन में न आ जाए, एक सच्चे शिकारी की तरह अपनी उंगलियों को शांत रखिए।​

अगर आपने समय की इज्जत करना सीख लिया, तो यह मार्केट आपके कैपिटल की इज्जत करना शुरू कर देगा।​क्या आप भी सुबह 9:15 बजे मार्केट खुलते ही ट्रेड पंच कर देते हैं? आपका पसंदीदा ट्रेडिंग टाइम कौन सा है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताएं और ‘बाज़ार सूत्र’ (bajarsutra.com) को सब्सक्राइब करना न भूलें!

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